बीएमसी ने अवैध निर्माण का हवाला देकर कंगना के दफ्तर के कुछ हिस्से को 9 सितंबर को तोड दिया था, जिसके बाद कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच जुबानी तकरार काफी बढ़ गई थी।
अभिनेत्री कंगना रनौत ने बंबई हाईकोर्ट में बीएमसी के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है . जवाब में कंगना की ओर से कहा गया है कि उनके दफ्तर पर की गई बीएमसी की कार्रवाई पक्षपातपूर्ण थी . उन्होंने इस बात से भी इनकार किया है कि जब कार्रवाई हुई , उस दौरान उनके दफ्तर में कोई निर्माण कार्य चल रहा था . कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा गया कि बीएमसी की कार्रवाई किस तरह से पक्षपातपूर्ण है , ये इसी से पता चलता है कि कंगना के ऑफिस के बगल में ही बने मनीष मल्होत्रा के ऑफिस में अवैध निर्माण की बात कहते हुए उनको अपना जवाब देने के लिए 7 दिन का वक्त दिया गया , जबकि कंगना के दफ्तर को 24 घंटे बाद ही गिरा दिया गया .पीठ उस अधिकारी को अनुमति देती है जिसने मामले में पार्टियों के रूप में शामिल होने के लिए कंगना रनौत के घर और धनंजय के विध्वंस के आदेश पारित किए।
बीएमसी ने क्या कहा था
बीएमसी ने पिछले हफ्ते अपने वकील जोएल कार्लोस के जरिये रनौत की याचिका के जवाब में न्यायमूर्ति एस जे कथावाला की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हलफनामा दायर किया था . बीएमसी ने कहा था कि अभिनेत्री ने इमारत में बिना इजाजत अहम ढांचागत बदलाव किये थे . बीएमसी ने कहा कि बीएमसी अधिकारी नौ सितंबर को उन बदलावों को तोड़ने के दौरान सिर्फ नियमों का पालन कर रहे थे .
क्या है मामला
बीएमसी ने नौ सितंबर को अवैध निर्माण का हवाला देते हुए कंगना रनौत के दफ्तर के कुछ हिस्सा को तोड़ दिया था , जिसके बाद से कंगना और महाराष्ट्र सरकार आमने सामने हैं . कंगना ट्विटर के ज़रिए महाराष्ट्र सरकार पर हमलावर है , जबकि सरकार का कहना है कि दफ्तर पर हुई कार्रवाई से उसका लेना देना नहीं है .
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