डीआरडीओ ने बुधवार को ओडिशा तट से पिनाका रॉकेट प्रणाली के नए संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया । रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ ) ने कहा कि लगातार छह रॉकेट छोड़े गए और परीक्षण के दौरान लक्ष्य पूरा करने में सफलता मिली । डीआरडीओ ने ट्वीट किया कि पिनाका रॉकेट प्रणाली का बुधवार को ओडिशा तट के पास चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया ।
पिनाका रॉकेट सिस्टम के उन्नत संस्करण मौजूदा पिनाका एमके – आई का स्थान लेंगे , जिसका वर्तमान में उत्पादन हो रहा है । अधिकारियों ने बताया कि यह रॉकेट अत्याधुनिक दिशासूचक प्रणाली से लैस है जिसके कारण यह सटीकता से लक्ष्य की पहचान कर उसपर निशाना साधता है । पुणे स्थित डीआरडीओ प्रयोगशाला , आयुध अनुसंधान एवं विकास स्थापना ( एआरडीई ) और हाई एनर्जी मैटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी ने इसका डिजाइन और इसे विकसित किया है । पिनाका रॉकेट की रेंज करीब 37 किलोमीटर है । पिछले दो महीने में भारत ने कई मिसाइलों का परीक्षण किया है । इसमें सतह से सतह पर मार करने में सक्षम सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस और एंटी रेडिएशन मिसाइल रूद्रम – एक भी शामिल है ।
रॉकेट का परीक्षण करने के बाद डीआरडीओ ने कहा ” कुल छह रॉकेट का परीक्षण किया गया और ये सभी अपने मिशन को पूरा करने में कामयाब रहे । ” इसमें आगे कहा गया कि छोड़े गए सभी रॉकेट्स की निगरानी टेलीमेट्री , रेडा और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम्स ( ईओटीएस ) से कई गई , जिसने उसकी परफॉर्मेंस की पुष्टि की है ।
पिनाका एमके -1 रॉकेट्स की जगह अब पिनाका रॉकेट का उन्नत वर्जन लेगा । पुराने पिनाका एमके -1 का रेंज 40 किलोमीटर था जबकि इसका उन्नत वर्जन 45 से 60 किलोमीटर तक के लक्ष्य पर निशाना साध सकता है । डीआरडीओ ने पिछले साल एमके -2 पिनाका रॉकेट सिस्टम का परीक्षण किया था , जिसका रेंज 70-90 किलोमीटर के बीच है । एमके -1 का उन्नत वर्जन इस खाई को भरने के साथ नजदीकी लक्ष्य पर निशाना साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है । इसको भारतीय सेना की उन जरूरतों को देखते हुए तैयार किया गया है जो चीन सीमा पर रॉकेट सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं । चीन ने कब्जे वाले अक्साई चिन में रॉकेट रेजिमेंट्स की तैनाती कर रखी है और पिनाका का उन्नत वर्जन भारतीय सेना को उसका जवाब देने में बेहद मददगार साबित हो सकता है ।
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