दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है , जिसमें प्राइवेट हॉस्पिटल के आईसीयू में 80 फीसदी बेड को कोरोना के मरीजों के लिए रिजर्व रखने के लिए कहा गया था . कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दिल्ली सरकार का आदेश आर्टिकल 21 का उल्लंघन है , और प्रथम दृष्टया इस आदेश में दिल्ली सरकार की मनमानी नजर आती है . कोर्ट ने कहा है कि कोरोना को प्राइवेट -अस्पतालों में आईसीयू बेड रिजर्व करने की वजह नहीं बनाया जा सकता है ।
याचिका में क्या कहा गया था
याचिका में कहा गया कि आदेश को इस बात का अहसास किए बिना अनियंत्रित , अनुचित और अवैध तरीके से पारित कर दिया गया कि निजी नर्सिग होम और अस्पतालों को इससे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है . इसके अलावा , इस तथ्य पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है कि नॉन – कोविड रोगियों को लंबे समय तक या अचानक बीमारी की स्थिति में आईसीयू / एचडीयू बेड की अनुपलब्धता के कारण घातक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं .
हरियाणा का दिया गया हवाला
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में गंभीर रूप से बीमार रोगियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले आवश्यक और संवैधानिक रूप से गारंटीकृत आईसीयू / एचडीयू में गहन चिकित्सा उपचार के आवश्यक स्तर तक पहुंच से वंचित कर दिया गया . इसमें कहा गया है कि हरियाणा राज्य में , गुरुग्राम के जिला मजिस्ट्रेट ने कोविड मामलों के उपचार के लिए सभी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में केवल 35 प्रतिशत बेड ही आरक्षित रखने का निर्देश दिया है . ।
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