पाकिस्तान जैसे मुस्लिम बहुल देश में हिंदुओं के उपर लगातार अत्याचार जारी है , उसके साथ साथ वहां पर अन्य धर्मों के अल्पसंख्यकों के उपर भी लगातार धार्मिक अत्याचार किए जा रहे हैं, पिछले दिनों ही खैबर पख्तूनवा में हिंदू मंदिर को वहां की भीड़ द्वारा तोड़ दिया गया था अब हिंदू महिला शिक्षक का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करके उसको इस्लाम कबूल करवाया गया है।

पाकिस्तान में हिंदू , सिख और ईसाई समुदाय की लड़कियों पर अत्याचार और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले अभी जारी है । हाल ही में सिंध प्रांत के बलूचिस्तान में हिंदू महिला अध्यापिका का जबरन धर्मांतरण करवा दिया गया है । ऐसा बताया जा रहा है कि उसका नाम बदलकर एकता से आयशा कर दिया गया है ।यही नहीं जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायत के बाद स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है । इसके अलावा इन मामलों पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी चुप्पी साध रखी है । लेकिन अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली संस्था वॉइस ऑफ माइनॉरिटी ने इस घटना पर चिंता जाहिर की है ।
पाकिस्तान में कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान हिंदू और ईसाई लड़कियों का जमकर धर्मांतरण हुआ है । पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा है कि इस कारण अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा की भावना भी तेजी से बढ़ी है । इमरान खान की सरकार में पुलिस के ढुलमुल रवैये और सख्त कानून न होने के कारण कट्टरपंथियों के हौसले और बुलंद हुए हैं ।अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने इस महीने पाकिस्तान को धार्मिक आजादी के उल्लंघन को लेकर खास चिंता वाला देश घोषित किया । हालांकि , अमेरिका के इस फैसले को पाकिस्तान ने खारिज किया है । पाकिस्तान में एक स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग के अनुसार इन लड़कियों को आम तौर पर अगवा किया जाता है और फिर इनका निकाह करवाया जाता है । ऐसी लड़कियों में अधिकतर सिंध प्रांत से गरीब हिंदू लड़कियां होती हैं ।
कट्टरपंथियों के निशाने पर लड़कियां
पाकिस्तान में मौजूद इस्लामिक कट्टरपंथी लगातार अल्पसंख्यकों की लड़कियों को निशाना बना रहे हैं और उनको जबरदस्ती अगवा करके उनका धर्म परिवर्तन करा रहे हैं और ऐसे कट्टरपंथी संगठन और लोगों के उपर ना तो वहां के पुलिस का कोई डर है और ना ही कानून का बल्कि ये खुले आम इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं क्योंकि इनके उपर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है।
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